26/02/2026
परसों होली की शॉपिंग के लिए बाहर गई थी। यूँ तो ज़रूरत भर की चीज़ें ले ली थी मैंने लेकिन फ़िर भी मन नहीं माना तो बिल पे करने से पहले सोचा मॉल के एक और चक्कर काट लूँ, ताकी कोई खूबसूरत चीज़ मेरी नज़रों से बच न जाए। सेकेंड फ्लोर पर कुर्तियों के सेक्शन में घूम रही थी कि देखा मैं जहाँ जा रही हूँ, मुझसे पहले एक सेल्स बॉय वहाँ पहुँच कर पहले से ही ठीक-ठाक लगी कुर्तियों को ठीक करने लगता। उसकी इस हरकत पर भीतर से बुरी तरह झुंझलाने के बाद भी उसके "नेचर ऑफ जॉब" को समझते हुए मैं शांत रही और उसे व्यस्त करने के इरादे से एक ख़ास किस्म के कुर्ते की डिमांड कर दी। उसने इशारे से समझाया कि मैं जैसा चाह रही, वैसा कुर्ता मौज़ूद नहीं है। हाँ, उससे थोड़ा मिलता जुलता कुर्ता है। मैंने फ़िर उसे अपने उस ख़ास किस्म का कुर्ता ढूँढने का उद्देश्य बताते हुए कहा कि क्यों मुझे मिलता जुलता नहीं, बल्कि बिल्कुल वही चाहिए। उसने फ़िर इशारे से समझाया कि मैं जो ढूंढ रही, वह नहीं है। इस बीच कितनी ही बार भूल वश मैंने खुद बोलना छोड़ अपनी बात उसे इशारे में समझाने की कोशिश करती और अगले ही पल स्वयं को समझाती कि अगला बोल नहीं ...